GONDIA: गुदमा–प्रताप बाग नई रेल लाइन के मुआवजे पर किसानों का आक्रोश; अंतिम निवाड़ा दुरुस्त करने की मांग

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18 अक्टूबर की समयसीमा बढ़ाने और त्रुटिपूर्ण निवाड़ा रद्द कर सुधारने के लिए किसान जमीन बचाओ संघर्ष समिति ने एसडीओ को सौंपा ज्ञापन

गोंदिया 12 अक्तूबर : गुदमा से प्रताप बाग तक प्रस्तावित नई रेलवे लाइन के लिए किए जा रहे भूमि अधिग्रहण में किसानों को मिल रहे कथित अत्यंत कम मुआवजे को लेकर विरोध तेज होने लगा है। किसानों की जमीन के अधिग्रहण और मुआवजे से जुड़े मामलों में सामने आ रही समस्याओं के बीच किसान जमीन बचाओ संघर्ष समिति, गोंदिया ने अब प्रशासन के समक्ष अपनी मांगें बुलंद की हैं। समिति ने मुआवजा राशि स्वीकार करने की निर्धारित अंतिम तारीख 18 अक्टूबर 2026 को आगे बढ़ाने तथा भूमि अधिग्रहण अधिकारी द्वारा जारी त्रुटिपूर्ण अंतिम निवाड़े को रद्द कर उसमें आवश्यक सुधार करने की मांग की है। इस संबंध में 12 अक्टूबर 2026 को गोंदिया के उपविभागीय अधिकारी को ज्ञापन सौंपा गया।

इससे पूर्व स्थानीय मयूर लॉन, कटंगी कला, गोंदिया में किसान जमीन बचाओ संघर्ष समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में गुदमा से प्रताप बाग नई रेलवे लाइन के लिए भूमि अधिग्रहण, मुआवजे की राशि तथा अंतिम निवाड़े में बताई जा रही त्रुटियों पर विस्तार से चर्चा की गई। किसानों के सामने आ रही व्यावहारिक समस्याओं को ध्यान में रखते हुए बैठक में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया गया कि मुआवजा राशि लेने की अंतिम तारीख 18 अक्टूबर 2026 को आगे बढ़ाया जाए, ताकि प्रभावित किसानों को अपने जमीन संबंधी दस्तावेजों और अभिलेखों में आवश्यक सुधार कराने के लिए पर्याप्त समय मिल सके।

समिति का कहना है कि भूमि अधिग्रहण अधिकारी द्वारा जारी पत्र के आधार पर जिन किसानों की जमीन अथवा प्लॉट का बंटवारा भूमि अभिलेख कार्यालय के माध्यम से किया जाना आवश्यक है, उनकी यह प्रक्रिया अब तक पूरी नहीं हुई है। ऐसे में जब जमीन के बंटवारे की प्रक्रिया ही अधूरी है, तब किसानों से निर्धारित समयसीमा के भीतर मुआवजा राशि लेने की अपेक्षा करना उनके लिए परेशानी का कारण बन रहा है। यदि समय रहते अभिलेखों का बंटवारा और आवश्यक सुधार नहीं किया गया, तो प्रभावित भूधारकों को मुआवजे की प्रक्रिया में आगे भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। इसी समस्या को देखते हुए समिति ने प्रशासन से समयसीमा बढ़ाने की मांग की है।

इसके साथ ही समिति ने भूमि अधिग्रहण अधिकारी द्वारा जारी अंतिम निवाड़े में अनेक प्रकार की त्रुटियां होने का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया है। समिति की मांग है कि इन त्रुटियों की तत्काल जांच की जाए और अंतिम निवाड़े को रद्द कर आवश्यक सुधार किया जाए अथवा उसे विधिसम्मत तरीके से दुरुस्त किया जाए, ताकि प्रभावित किसानों के हितों की अनदेखी न हो। किसानों का पक्ष है कि भूमि अधिग्रहण और मुआवजे की प्रक्रिया में दस्तावेजों की शुद्धता तथा उचित मुआवजे का निर्धारण अत्यंत महत्वपूर्ण है। किसी भी प्रकार की त्रुटि का खामियाजा जमीन मालिकों को नहीं भुगतना पड़ना चाहिए।

नई रेलवे लाइन के लिए भूमि अधिग्रहण का मामला किसानों की जमीन और उनकी आर्थिक सुरक्षा से जुड़ा हुआ है। ऐसे में मुआवजे की राशि को लेकर असंतोष और अंतिम निवाड़े में कथित त्रुटियों का मुद्दा प्रभावित भूधारकों के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गया है। किसान जमीन बचाओ संघर्ष समिति ने ज्ञापन के माध्यम से प्रशासन से मांग की है कि किसानों की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए मुआवजा स्वीकार करने की समयसीमा बढ़ाई जाए तथा निवाड़े में मौजूद त्रुटियों का तत्काल निराकरण किया जाए। अब किसानों की निगाहें प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं।

ज्ञापन सौंपने के दौरान समिति के अध्यक्ष अखिलेश सेठ, सचिव अमित बुद्धे, कार्तिक चौहान, चुटे गुरुजी, राजेश नागरिकर, सुप्रीत बैंस, किशोर उपाध्याय, किशोर चौरसिया, अय्यूब शेख, जितेंद्र लिल्हारे, जीतू लिल्हारे, सूरज बावनकर, राधाकृष्ण ठाकुर, हेमंत नागपुरे, प्रीत लाल चिखलोंडे, मोतीराम लिल्हारे, सोहन लाल नागपुरे सहित बड़ी संख्या में किसान, प्लॉटधारक, दुकानदार और मकान मालिक उपस्थित थे। समिति ने प्रभावित भूधारकों की समस्याओं के निराकरण और मुआवजे की प्रक्रिया में आवश्यक सुधार की मांग को लेकर प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया है।

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